Friday, February 24, 2023

NASHA AUR MUKTI.

 


नशा और मुक्ती |
सारे नशे मन को उतेजित करने वाले होते हैं जो कि तामसिक होते हैं ,जैसे शिव जी भांग का नशा करते थे,सिखों में भी निहंग सिंह भांग का नशा करते हैं | नशे का मतलब ही तुम्हारी होश को अलोप करना है जहाँ तुम्हारी होश काम न करे | नशा किया ही जाता है होश के विरोध में |नशे से आजाद होने का और होश में रहने का नाम ही नशे से मुक्ती है |नशों को इंग्लिश में टोक्सिन [जहरीले पदार्थ] कहते हैं | असली मैडिटेशन होश साधने को ही कहते हैं ,अरध बे होश या बेहोश होने को नहीं जैसे कई गुरु लोग सिखा रहे हैं,यह सभी लोग नशे करने वाली परंपरा के हैं जो होश के विरोध में है | कुंडलिनी योग इसकी सभ से बड़ी उद्धरण है |यह दुसरे लोगों को बेहोशी में ले जा कर उनसे धन की ठग्गी करने की है | इसी लिए तो ऐसे गुरु लोगों के आश्रम और उनके बिज़नस करोड़ों में होते हैं |

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