बानी,पवन,हवा,धवनि,वायु ही गुरु है।
बानी,जो हमारे बोल हैं,जो पवन,हवा,धवनि के जरिये बोली जाती है,जो हमारे अंदर बाहर होने वाली स्वास वायु[ऑक्सीजन और नाइट्रोजन] है, जिसको साइंस में रेडियो वेव साउंड एनर्जी बोलते हैं और जिसको हिन्दू धरम में हनुमान/गुरु और सत गुरु नानक वायु ही गुरु कहते हैं जिसको आयुर्वेदा में सभी दर्दों का और भूत प्रेतों और मनो वैज्ञानिक बिमारियों का कारण समझा जाता है। वायु ही बादलों को उड़ाए फिरती है और आकाश में ले जा कर वहां की ठण्ड से बारिश करवाती है। वायु की सिद्धि से ही मन्त्रों या वाइब्रेशन फ्रीक्वेंसी द्वारा धर्मों और अध्यात्म में रहस्मई खेल या आर्ट दिखाए / किये जाते हैं। आज कल टीवी,कंप्यूटर, आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस और आनेवाले रहस्मई युग का कार्य भी वायु से ऊपर की सत्ता इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वाइब्रेशन और फ्रीक्वेंसी [इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम] के माध्यम से ही किया जा रहा है।
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