जीवन और मरीतु एक बदलने का खेल है ।
यह हवाएं [सवास] भी वही हैं,यह बादल [पानी] जो अहंकार में गरजता है,बिजली गिराता है,भी वही है और यह सूर्य की रौशनी भी वही है,तो जो बदला है वह यह जर जर हुआ शरीर था जो उतार कर,जलाने के लिए,जमीन पर रख दिया है , अब किसी और नए शरीर को भोगने के लिए, तलाश जारी है या पहन लिया है।
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