धुर की बाणी किया है ?
बाणी= हवा [पवन] +पानी धारा=जीवन धारा।,
साइंटिफिकली, यह धुर की बाणी, पवित्तर [डिस्टिल्ड] पानी, बादलों का पानी और हवा के मिश्रण की , जीवन देती हुई, धारा है जो कि हमारे मतषक [हिमालय] के ग्लेशियर से होती हुई हमारे नर्वस सिस्टम से गुजरती हुई नीचे सारंगी का,ऊँ गीत गाती हुई समुन्दर [ओसियन] में उतर आती है।नानक ने इस को इक ऊं कार की ध्वनि देती हुई, कुदरत के गियान की , धुर की बाणी कहा है, जिस से हम सभ कुछ कुदरत को साईंटिफिकली जान कर और समझ कर बोलते हैं। इस में रति भी अंध विश्वाश नहीं है। इस धारा को कोई भी सिख [लगन से सीखने वाला ] विद्यार्थी, वैज्ञानिक मैडिटेशन के द्वारा पा सकता है।
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