माटी के जगते दिए।
ओ माटी के जगते दियो, तुम कभ तक अपने अहंकार को बचाते हुए इस दुनिया में खलबली मचाते रहोगे। एक दिन तुम्हारा यह खेल एक हवा के झोंके से मिट जाएगा और मिटटी का दिया मिटटी में मिल जाएगा। तुम कियूं नहीं इस हवा के झोंके को साध कर अमर हो जाते और सदा दीयों को जगाने वाला बन जाते
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