भारतीय समाज।
भारतीय समाज को, कुछ पोलिटिकल पार्टियों ने और कुछ नॉन वैज्ञानिक धरम के ठेकेदारों ने अपने मंतव्य पूरे करने के लिए, अंध विश्वाशों और जात पात के चक्रों में उलझके रखा हुआ है और सरकार दवारा समग्र समाज के जीवन के उठान,एजुकेशन, सेहत,कारोबार और इसकी ख़ुशी के लिए कोई प्लान या कोशिश नहीं है। देश के लोग भी अपनी अपनी जिनगी में किसी न किसी तरह घिस पिट कर सभ तरह के अतियाचार सहते हुए अपने भगवान् के अंध विश्वाश के भरोसे चले जा रहे है। कोई वैज्ञानिक, प्रगतिशील और क्रांति कारी सोच नहीं है।
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