साधु,संत और तांत्रिकस [हिन्दुतवा जीवन]।
भारत में लोगों में दो तरह के लोग हैं ,एक तो परिश्रमी ,उधमी,मेहनतकश जिनको मजदूर और किसान भी कहते हैं जो भारत की इकॉनमी के सर्जनकर्ता हैं और दुसरे, निष्क्रिय ,भजन,कीर्तन,गियान,धियान और भगति देने वाले साधू ,संत और तांत्रिक लोग हैं इन लोगों का भारत की इकॉनमी में कोई हिस्सा नहीं है यह सिर्रफ मजदूरों,किसानों या अमीरों की आमदन पर ही निर्भाव करते हैं,मांगते हैं ,लूटते और ठग्गी करते हैं हैं,महाभारत की लड़ाई में लार्ड कृष्ण ने ऐसे ही निष्क्रिय , कोई लाभकारी करम ना करने वाले लोगों [कौरवों ]को ही मरवाया था और धरम [सचाई] को स्थापित किया था।
भारत में लोगों में दो तरह के लोग हैं ,एक तो परिश्रमी ,उधमी,मेहनतकश जिनको मजदूर और किसान भी कहते हैं जो भारत की इकॉनमी के सर्जनकर्ता हैं और दुसरे, निष्क्रिय ,भजन,कीर्तन,गियान,धियान और भगति देने वाले साधू ,संत और तांत्रिक लोग हैं इन लोगों का भारत की इकॉनमी में कोई हिस्सा नहीं है यह सिर्रफ मजदूरों,किसानों या अमीरों की आमदन पर ही निर्भाव करते हैं,मांगते हैं ,लूटते और ठग्गी करते हैं हैं,महाभारत की लड़ाई में लार्ड कृष्ण ने ऐसे ही निष्क्रिय , कोई लाभकारी करम ना करने वाले लोगों [कौरवों ]को ही मरवाया था और धरम [सचाई] को स्थापित किया था।
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