दुनिया की सोच।
दुनिया की सोच इंसान की शांति, सेहत और ख़ुशी की रक्षा करने के बजाए इंसान को मारने के लिए ,तरह तरह के जंगी हथियार बनाने की होड़ में लगी हुई है। यह दुनिया जलादों की दुनिया बन गई है जिस में इंसानियत का मतलब ही गुम हो गया है। हम ने ऐसी दिनिया की तो कभी कल्पना नहीं की थी, फिर ऐसे इंसानियत विरोधी हुकमरान कहाँ से आ गए हैं ?
दुनिया की सोच इंसान की शांति, सेहत और ख़ुशी की रक्षा करने के बजाए इंसान को मारने के लिए ,तरह तरह के जंगी हथियार बनाने की होड़ में लगी हुई है। यह दुनिया जलादों की दुनिया बन गई है जिस में इंसानियत का मतलब ही गुम हो गया है। हम ने ऐसी दिनिया की तो कभी कल्पना नहीं की थी, फिर ऐसे इंसानियत विरोधी हुकमरान कहाँ से आ गए हैं ?
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