Thursday, June 25, 2020

जीवन दाता सूर्या।
अगर तू न होता तो जीवन भी न होता,
हर जगह धरती पर सिर्फ ग्लेशियर ही होता।
अगर तू न होता तो गर्मी न होती
ग्लेशियर ना ढलते तो पानी न होता।
यह पानी न होता तो नदियाँ न बहती,
नदियाँ न होतीं तो यह  समुन्दर भी न होता।
समुन्दर के पानी की भाफ भी न बनती,
न बनते बादल और बारिश भी ना होती।
धरती पर कोई हरियाली भी ना होती ,
ना ही कोई जीवन की उत्पति होती।
तू ही धरती माता को रोशन करता है,गर्मी  देता है,
भोजन  देता है और सभी जीवों का जीवन चलता है।






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जीवन दाता सूर्या।
अगर तू न होता तो जीवन भी न होता,
हर जगह धरती पर सिर्फ ग्लेशियर ही होता।
अगर तू न होता तो गर्मी न होती
ग्लेशियर ना ढलते तो पानी न होता।
यह पानी न होता तो नदियाँ न बहती,
नदियाँ न होतीं तो यह  समुन्दर भी न होता।
समुन्दर के पानी की भाफ भी न बनती,
न बनते बादल और बारिश भी ना होती।
धरती पर कोई हरियाली भी ना होती ,
ना ही कोई जीवन की उत्पति होती।
तू ही धरती माता को रोशन करता है,गर्मी  देता है,
भोजन  देता है और सभी जीवों का जीवन चलता है।






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जीवन दाता सूर्या।
अगर तू न होता तो जीवन भी न होता,
हर जगह धरती पर सिर्फ ग्लेशियर ही होता।
अगर तू न होता तो गर्मी न होती
ग्लेशियर ना ढलते तो पानी न होता।
यह पानी न होता तो नदियाँ न बहती,
नदियाँ न होतीं तो यह  समुन्दर भी न होता।
समुन्दर के पानी की भाफ भी न बनती,
न बनते बादल और बारिश भी ना होती।
धरती पर कोई हरियाली भी ना होती ,
ना ही कोई जीवन की उत्पति होती।
तू ही धरती माता को रोशन करता है,गर्मी  देता है,
भोजन  देता है और सभी जीवों का जीवन चलता है।






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जीवन दाता सूर्या।
अगर तू न होता तो जीवन भी न होता,
हर जगह धरती पर सिर्फ ग्लेशियर ही होता।
अगर तू न होता तो गर्मी न होती
ग्लेशियर ना ढलते तो पानी न होता।
यह पानी न होता तो नदियाँ न बहती,
नदियाँ न होतीं तो यह  समुन्दर भी न होता।
समुन्दर के पानी की भाफ भी न बनती,
न बनते बादल और बारिश भी ना होती।
धरती पर कोई हरियाली भी ना होती ,
ना ही कोई जीवन की उत्पति होती।
तू ही धरती माता को रोशन करता है,गर्मी  देता है,
भोजन  देता है और सभी जीवों का जीवन चलता है।






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जीवन दाता सूर्या। 
अगर तू न होता तो जीवन भी न होता,
हर जगह धरती पर सिर्फ ग्लेशियर ही होता। 
अगर तू न होता तो गर्मी न होती
ग्लेशियर ना ढलते तो पानी न होता। 
यह पानी न होता तो नदियाँ न बहती,
नदियाँ न होतीं तो यह  समुन्दर भी न होता। 
समुन्दर के पानी की भाफ भी न बनती,
न बनते बादल और बारिश भी ना होती। 
धरती पर कोई हरियाली भी ना होती ,
ना ही कोई जीवन की उत्पति होती। 
तू ही धरती माता को रोशन करता है,गर्मी  देता है,
भोजन  देता है और सभी जीवों का जीवन चलता है। 






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