खोजी का जीवन सार।
भूखा खोजे भोजन को और पियासा खोजे पानी,
मरता खोजे सवास [ऑक्सीजन] को ,बस यही है उसकी जिंदगानी की कहानी।
वाहिगुरु [पवन गुरु- ऑक्सीजन ] को तुम्हारी उसतत की जरूरत नहीं, वह तो हर जगह हरयाली के पास मौजूद है,इस को अपने दिल में/खून में रचाना है,
सही जीवन जीने के लिए, पवन गुरु का उपयोग बस इसी गहरे सवास की कला में है ,नहीं तो सभ ही धंदा है,पाखण्ड है,सिर्फ धन बटोरने का बहाना है।
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