Wednesday, December 19, 2012

साइंस ,परगति और संतुलन 
जो भी परगति आज नजर आती है सभ साइंस की वजह से है ,
लेकिन इस परगति के साथ साथ पर्दूषण,हादसे और बीमारियाँ भी बढे हैं ,
अब हम इस दौर से पीछे तो जा नहिं सकते ,न ही इस परगति के बगेर रह सकते हैं ,
इस लिए हमें परगति और इसकी बुरायों के बीच में सतुलन करना होगा ।
जहाँ साइंटिफिक सोच अंधविश्वासों को दूर करती है और जीवन को सरल बनाती है ,
वहीँ रोज़गार के अवसर भी बढ़ाती है और काम करने के तरीकों में तेजी भी लाती है,
इस लिए हमें जीवन को साइंटिफिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए और इसको बढ़ाना चाहिए,
प्यार और शांति से रहना चाहिए,अन्धविश्वास और झूठ फरेब से दूर रहना चाहिए और एक अछे,
परगतिशील,जातिवाद रहत ,धरम निरपेक्ष और सवच्छ समाज और देश का निर्माण करना चाहिए।

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