हम सभी कौन हैं ?
हम नहीं हैं हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई,जैन और बुध,
हम सभ हैं माटी से बने शरीरों के खाली बर्तन और कंटेनर।
जिन को जीने के लिए, खाने पीने और हवा से भरना होता है,
और गन्दा होने से और बीमार होने से, नहाना और साफ़ सुथरा रखना होता है।
हम हैं बुद्धों की संतान,जिन को कहते हैं इंसान,नहीं बनते कभी बेईमान।
आओ मिल कर सभी प्रेम करें,अपने जीवनों को अँधेरे से रोशन करें ,
मिटादें सभी नफरतों के बीज,और एक सूंदर और अम्न,प्रेम की दुनिया का निर्माण करें ।
हम सभ एक ही माला के, हवा के धागे में बंधे, मोतियों के मनके हैं ,
एक ही पर्भू की संतान हैं और इस धरती से प्रेम करने वाले रखवाले हैं।
हम सभ एक माला में हवा के धागे में बंधे मोतियों के मनके हैं ,
एक ही पर्भू की संतान हैं और इस धरती से प्रेम करने वाले रखवाले हैं।
हम भगवान की अमृत रस से भरे पियाले हैं,
अनंत खुशियों को मानाने वाले सनातन सम्पदा के फ़रिश्ते हैं।
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