हमारा मन,आत्मा और चेतना।
हम पृथ्वी ततुओं से बना एक शरीर हैं। जिस में भोजन,पानी और हवा की ऑक्सीडेशन से पैदा हुई गर्मी की शक्ति हमारे शरीर को चला रही है।जो नीचे मल और मूतर है हमारा मन है और इस में से उठ रहे कार्बन डाइऑक्साइड युक्त गंदे भाव हमारे विचार हैं,जिनको ऊपर दिमाग में ले जाने से मेन्टल बीमारियां होती हैं,इनको नाक से ही बाहर निकाल देना चाहिए और फेफड़ों की ऑक्सीजन युक्त ताज़ी हवा हमारी आत्मा है। ऊपर से सूर्य की या किसी रौशनी के और सोर्स से आ रही शक्ति की रौशनी हमारी चेतना है।
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