भारत की मानसिकता।
भारत वासी पुराने ज़माने से हिन्दू धरम के बनाने वाले ब्राह्मणों और बाबाओं की मानसिकता के गुलाम रहे हैं,जिन का रोजगार, हमेशा से आम लोगों को, अंध विश्वाशों से गुम राह करके,ग्रहों,देवी देवताओं,भगवानों और भूत प्रेतों के चक्रों में डाल कर , डरा कर, ठगते और लूटते रहे हैं, जब कि वैज्ञानिक तौर पर सचाई कुछ और ही है और बहुत सरल है इस लिए भारत की मानसिकता अभी तक भी, अवैज्ञानिक धर्मों के अंध विश्वाशों के चक्रों ।से बाहर नहीं आ सकी है और वैज्ञानिक मानसिकता की तरकी में, दुनिया में, सभ से पीछे चल रहा है।
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