जीवन की खोज
सारा जीवन भटकता है मन कुछ पाने को,
नहीं पता चलता कि पाना क्या है ।
थक टूट कर गिरने लगता है ,
और रोता है कि मैने पाया किया है ।
वकत गुज़र गया अब हाथ नहीं आएगा,
बस मरना ही बाकी है ऐसे पछताएगा।
दुख कामना है उसकी जो मिलता नहीं,
सुख कामना है जो घडी भर के लिए मिलता है ।
आनंद दुख और सुख के पार है जो सदा ही मिलता है,
पर आनंद का सागर अन्दर है बाहर नहीं मिलता है ।
सवाल उठता है कि इस आनंद को पाएं कैसे ?
जीवन के दुखों की गुथी को सुलझाएँ कैसे ?
ध्यान है कला इस आनंद को पाने की ,
सीखो किसी से यह खोज अनजाने की ।
करम सिंह
सारा जीवन भटकता है मन कुछ पाने को,
नहीं पता चलता कि पाना क्या है ।
थक टूट कर गिरने लगता है ,
और रोता है कि मैने पाया किया है ।
वकत गुज़र गया अब हाथ नहीं आएगा,
बस मरना ही बाकी है ऐसे पछताएगा।
दुख कामना है उसकी जो मिलता नहीं,
सुख कामना है जो घडी भर के लिए मिलता है ।
आनंद दुख और सुख के पार है जो सदा ही मिलता है,
पर आनंद का सागर अन्दर है बाहर नहीं मिलता है ।
सवाल उठता है कि इस आनंद को पाएं कैसे ?
जीवन के दुखों की गुथी को सुलझाएँ कैसे ?
ध्यान है कला इस आनंद को पाने की ,
सीखो किसी से यह खोज अनजाने की ।
करम सिंह
No comments:
Post a Comment