Friday, December 13, 2019

हम भगवान जीवन और हमारे बनाए हुए नकली पूजा घर ।
अगर हम न होते तो यह धरम भी न होते,
ना ही होते मंदिर,मस्जिद,गुर्दवारे और गिरजा घर ।
ना ही होती इन में मूर्तियां और धर्म ग्रन्थ ,
ना धर्मों में अपराध ही होते ,ना होते इन के झगडे ।
ओ मूरख इंसानों यह ईटों पथरों के पूजा घर तुम ही ने तो बनाए हैं,
यह सभ तुम्हरे जिन्दा शरीर की नकलें हैं जिन में असली जीवन भगवान् रहते हैं ।
यह सभ तुम ने दूसरों को मूरख बना कर अपनी गोलकें भरने के लिए बनाए हैं ,
असली भगवान् और परमात्मा तो तुम्हारे ही शरीर में तुम्हारा अपना जीवन ही है ।

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